आंदोलन कितना सहीं, कितना गलत स्वयं विचार करें : एसएसपी

  आंदोलन कितना सहीं, कितना गलत स्वयं विचार करें : एसएसपी

छत्तीसगढ़ में 25 जून को होने वाले पुलिसकर्मियों के आंदोलन पर बुधवार को रायपुर एसएसपी अमरेश मिश्रा की एक अपील आई है। अपील में उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाने वाली पुलिस के लिए आंदालन कितना सही व कितना गलत है इस पर एक बार स्वयं विचार करें। उन्होंने इस अपील में बताया है कि, अपनी सेवा शर्तों के अनुसार पुलिसकर्मी न तो आंदोलन कर सकते हैं और नहीं किसी आंदोलन का हिस्सा बन सकते हैं।
उन्होंने अपील में कहा है, इन दिनों हम एक अलग सी हवा को महसूस कर रहे हैं। अपने विभाग में, जिसकी आधारशिला ही अनुशासन पर राखी गई है। हमारे साथी कर्मचारी अपने बुनियादी मसलों को लेकर चिंता दिखा रहे हैं। इसके लिए परिजनों को मोहरा बनाकर आंदोलन की भूमिका तय की जा रही है। एक तरह से वे इस में परोक्ष रूप से शामिल हो रहे हैं। आपको पता है कि आप पुलिस की सेवा के खास हिस्से हैं, जो हमें खुद अनुशासित रहते हुए, दूसरों को अनुशासन सिखाने का बोध कराती है । वर्तमान और भविष्य को जानना भी जरूरी हो जाता है। आपकी जानकारी के लिए यह तथ्य उपयोगी होगा कि पुलिसकर्मी किसी भी तरह के प्रदर्शन या आंदोलन नही कर सकते, शामिल नहीं हो सकते और ना अपने पक्ष में किसी को अभिप्रेरित कर सकते हैं।
पुलिस द्रोह अधिनियम 1922 (छग में संशोधित अधिनियम 1981 की धारा 4) के तहत ऐसा करना संबंधित के लिए दण्डनीय है। इसमें सेवा समाप्ति तो है ही, अभियोजन का पक्ष सुने बिना जमानत का प्रावधान भी नहीं है। ध्यान रहे, आपके साथ परिवार की अहम जिम्मेदारियां भी हैं। इसलिए अच्छे और गलत कदम के प्रभाव सभी को प्रभावित करेंगे।
आपको समझना होगा कि छत्तीसगढ़ में नक्सल और मैदानी क्षेत्र में भिन्न-भिन्न समस्या हैं। हमारे जवान, कर्मचारी आत्मबल से कर्तव्य निर्वहन कर रहे है. इसलिए आप खुद चिंतन कीजिए आवास, अवकाश, वेतन, भत्ते, स्वास्थ्य जैसी सुविधा बेशक आवश्यक हैं। इस दिशा में पुलिस कल्याण बोर्ड के प्रयास से स्थिति बीते वर्षों के मुकाबले सुधरी है। ऐसे प्रयास अभी थमे भी नहीं हैं। अर्थात, आपके समग्र हितों के बारे में अनेक स्थायी और दीर्घकालिक प्रस्तावों पर राज्य सरकार और पुलिस विभाग के अधिकारी गंभीरतापूर्वक विचार कर रहे हैं। विश्वास और धैर्य रखिए, आने वाले समय में दृश्य बेहतर होगा। विनम्र आग्रह, बुरे वक्त में परछाई भी आदमी का साथ छोड़ देती है। दूसरों के उकसावे में आकर हम ऐसा कुछ तो नही करने जा रहे, जिसके लिए पूरी जिंदगी सिर्फ पछताना पड़े। विचार अवश्य करें।

Source: 
visionnewsservice.in

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