इस गांव से लापता हो गए 11 ग्रामीण, 8 महिलाएं भी शामिल

जिले के अंतिम छोर पर पामेड़ थाना क्षेत्र के तीन पुरुष और आठ महिला समेत कुल 11 ग्रामीण पिछले 12 दिनों से लापता बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव के आठ ग्रामीणों को जगरगुंडा थाने में गिरफ्तार किया गया था, जिसकी सूचना उन्हें पामेड़ थाना से प्राप्त हुई थी। डीआईजी दक्षिण बस्तर रेंज सुंदरराज पी ने कहा कि नक्सल मामलों में गिरफ्तारी की विधिवत सूचना परिजनों को दी जाती है। ग्रामीणों के लापता होने की जानकारी नहीं हैं। चेक करवाते हैं।
00 क्या है पूरा मामला ;
इसके बाद गांव से गिरफ्तार लोगों से मिलने निकले 11 परिजन आज तक घर नहीं लौटे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जगरगुण्डा पुलिस उन्हें इस मामले की सही जानकारी नहीं दे रही है। मीनागट्टा निवासी ग्रामीण अजय मुचाकी ने कहा कि 13 नवंबर को पामेड़ थाना से उन्हें सूचना दी गई थी कि जगरगुंडा पुलिस की ओर से मीना गट्टा निवासी मड़कम सोमा, बेट्टी सुक्का, मड़कम बंडी, बोमगुड़ा निवासी माड़वी मंगल, मड़कम सोमला, मड़कम जोगा पिता हिड़मा, मड़कम जोगा पिता मंगलू और हेमला सोला को चिंतलनार थाने में दर्ज अपराधों के मामले में 12 नवंबर को गिरफ्तार किया गया है। 14 नवंबर को गिरफ्तार लोगों से मिलने के लिए बोमगुड़ा से आठ महिला और तीन पुरुष जगरगुण्डा के लिए निकले थे। इनमें बोमगुड़ा निवासी माड़वी अंदा, हेमला देवा, हेमला हिड़मा, हेमला हिड़मे, कड़ती दुले, मड़कम नंदे, मड़कम हिड़मे, मड़कम लक्खे, मड़कम हुंगी, ताती हुंगी और हेमला हिड़मे शामिल हैं। 12 दिन से अधिक हो चुके हैं और इनका पता नहीं है।
00 नहीं मिल पा रहा ग्रामीणों का कोई सुराग ;
जगरगुण्डा के लिए रवाना हुए 11 ग्रामीणों का किसी प्रकार का सुराग नहीं मिल पा रहा है। लापता ग्रामीणों की खोज-खबर के लिए जब अन्य ग्रामीण जगरगुण्डा थाने पहुंचे तो पुलिस ने कहा कि यहां कोई भी ग्रामीण नहीं आया है। मुचाकी अजय का कहना है कि लापता ग्रामीणों की कई दिनों से तलाश की जा रही है, परंतु आज पर्यंत सुराग न मिलने से परिजन और गांव वाले काफी परेशान हैं। गौरतलब है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने से बीते वर्षों में भी ऐसी स्थिति बनी है। कभी नक्सलियों ने बंधक बनाया था तो कभी पुलिस ने नक्सली मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस मामले में अभी तक तस्वीर साफ नहीं है।

Source: 
Vision News Service

Related News