ई-वे बिल प्रणाली में राहत देने के लिए मुख्यमंत्री का अभिनंदन

ई-वे बिल प्रणाली में राहत देने के लिए मुख्यमंत्री का अभिनंदन

शासन की ओर से छत्तीसगढ़ में व्यापार और उद्योग जगत को ई-वे बिल में दी गई राहत के लिए छत्तीसगढ़ चेम्बर आफ कामर्स की ओर से मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का उनके निवास कार्यालय में अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर विधायक और चेम्बर के संरक्षक श्रीचंद सुंदरानी, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष छगन मुंदड़ा सहित चेम्बर के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में विभिन्न व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में व्यापार और उद्योग जगत की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि राज्य में व्यापारिक हितों के लिए चेम्बर आफ कामर्स और अन्य संगठनों ने सदैव सकारात्मक भूमिका का निर्वहन किया है। डॉ. सिंह ने कहा कि विभिन्न मांगों के लिए संगठन ने सदैव आपसी विचार विमर्श का रास्ता अपनाया वह अन्य राज्यों के लिए उदाहरण है। छत्तीसगढ़ चेम्बर आफ कार्मस के संरक्षक श्रीचंद सुन्दरानी ने कहा कि चेम्बर की ओर से जब भी व्यापारिक समस्याओं पर सरकार के समक्ष मांग रखी गई उसका मुख्यमंत्री ने शतप्रतिशत निराकरण किया है। उन्होंने ई-वे बिल प्रणाली में व्यापार और उद्योग जगत को राहत देने के लिए चेम्बर आफ कामर्स की ओर से मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। चेम्बर के अध्यक्ष जितेन्द्र बरलोटा ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से ई-वे बिल प्रणाली में सिर्फ 15 वस्तुओं की ढुलाई पर कर लगने से व्यापारियों और उद्योगों को राहत मिली है। इसी प्रकार भविष्य में लगातार सहयोग और आशीर्वाद मिलता रहेगा। जीएसटी के प्रावधानों के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर 50 हजार रुपए से ज्यादा के माल परिवहन के लिए ई-वे बिल जनरेट करने का प्रावधान 1 जून से लागू किया गया था। इसके बाद राज्य के व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से यह अनुरोध किया था कि प्रदेश में व्यापार और उद्योग जगत को राहत देने के लिए ई-वे बिल प्रणाली सिर्फ कुछ वस्तुओं पर ही लागू की जाए और एक जिले के भीतर होने वाले माल परिवहन को इससे छूट दी जाए।
राज्य सरकार की ओर से इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर राज्य के भीतर माल परिवहन पर ई-वे बिल प्रणाली सिर्फ पन्द्रह वस्तुओं में लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें खाद्य तेल, कनफेक्शनरी, पान मसाला, तम्बाकू उत्पाद, प्लाईवुड, टाईल्स, आयरन एण्ड स्टील, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक माल, मोटर पार्टस, फर्नीचर, फुटवियर, बेवरेजेस और सीमेंट आदि शामिल हैं। राज्य सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि एक जिले के अन्दर माल का परिवहन होने पर किसी भी वस्तु के संबंध में ई-वे बिल जेनरेट करने की जरूरत नहीं होगी। जिन वस्तुओं के संबंध में ई-वे बिल रखा गया है, उनमें भी ई-वे बिल जनरेट करना तभी होगा, जब भेजे जाने वाले माल की कीमत 50 हजार रुपए से ज्यादा हो।

Source: 
visionnewsservice.in

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