उच्च गुणवत्ता वाले गन्ने के टिश्यू कल्चर पौधे विकसित

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इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की ओर से राज्य के किसानों को उत्तम गुणों वाले रोगमुक्त गन्ने के पौधे उपलब्ध कराने के लिए पहली बार चार लाख से अधिक टिश्यू कल्चर पौधों का उत्पादन किया गया है। इन पौधों की उत्पादन क्षमता अधिक होने के साथ ही इनमें शर्करा की मात्रा भी ज्यादा है जिससे शक्कर उत्पादन भी अधिक होता है। टिश्यू कल्चर लैब की ओर से तैयार पौधे बिक्री के लिए 8 रुपए प्रति नग की दर पर उपलब्ध हंै। इन टिश्यू कल्चर पौधों से किसान अपने खेत पर ही शुद्ध रोपण सामग्री तैयार कर सकते हैं।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय टिश्यू कल्चर लैब के प्रभारी डॉ. एलएस वर्मा ने बताया कि आम तौर पर किसान गन्ने के सेट को बीज के रूप में लगाते हैं जिसके रोपण के लिए प्रति हेक्टेयर 55 से 60 क्विंटल सेट की आवश्यकता होती है। इतनी बड़ी मात्रा में बीज के खरीदी और परिवहन में ज्यादा खर्च होता है। साथ ही किसानों की ओर से खुद के खेत में उत्पादित सेट को लगाने से फसल में कीट व्याधि का प्रकोप बढ़ता है और उसकी उपज और शक्कर-गुड़ उत्पादन में कमी आती है। इसलिए किसानों को समय-समय पर रोपण सामग्री बदलते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार पौधों में उच्च उत्पादन क्षमता के साथ-साथ रोगों और कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता होने के कारण किसान टिश्यू कल्चर पौधों की नर्सरी लगाकर रोपण सामग्री तैयार कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के टिश्यू कल्चर लैब की ओर से बड़ी संख्या में उच्च गुणवत्ता, उत्पादकता और रोग-कीट प्रतिरोधी किस्मों के टिश्यू कल्चर पौधे तैयार किए गए हैं।

Source: 
visionnewsservice.in

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