कलेक्टर ने की महिला एवं बाल विकास विभाग के काम-काज की समीक्षा

कलेक्टर ने की महिला एवं बाल विकास विभाग के काम-काज की समीक्षा

कलेक्टर जे.पी.पाठक ने आज यहां अधिकारियों की बैठक लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग के काम-काज की समीक्षा की। उन्होंने अगले तीन महीने में जिले में बच्चों के वर्तमान कुपोषण स्तर 28 प्रतिशत से कमी लाते हुए 25 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य दिया है। कलेक्टर ने कहा कि इसके लिए विभाग एक कार्य-योजना बनाए। जिसके अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्र रोज खुलने चाहिए। बच्चों और गर्भवती माताओं को सरकार की योजनाओं के सभी फायदे निरंतर मिलने चाहिए। विभाग के सुपरवाईजरों को महीने में कम से कम 25 आंगनबाड़ी केन्द्रों के निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए कलेक्टर ने अलग से व्हाॅटसएप्प ग्रुप भी बनाए हैं। पाठक ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और नोनी सुरक्षा योजना में लक्ष्य से ज्यादा उपलब्धि के लिए विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की सराहना की है। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी आदित्य शर्मा सहित सभी परियोजना अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर ने बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति आदेश जारी करने के निर्देश जनपद पंचायतों के सीईओ को दिए हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के लगभग 200 पद विभिन्न जनपदों में नियुक्ति के लिए विचाराधीन हैं। छानबीन सहित पूरी प्रक्रिया विभाग की ओर से पूरी कर संबंधित जनपदों को सौंपी गई है। कलेक्टर ने बैठक में विशेष रूप से कुपोषित बच्चों पर विशेष ध्यान केन्द्रित करने के लिए कहा है। उल्लेखनीय है कि जिले की लगभग 2 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों में वर्तमान में एक लाख 19 हजार बच्चे दर्ज हैं। इनमें से लगभग 34 हजार बच्चे कुपोषित हैं। कलेक्टर ने पूरी ताकत झोंककर इन्हें सुपोषित स्तर पर लाने को कहा है। प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के अंतर्गत 12 हजार महिलाओं को लाभान्वित किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई आंगनबाड़ी भवन अत्यंत जर्जर हालात में है, बच्चों को असुविधा हो रही हो, तो फोटो के साथ प्रस्ताव दिया जाए ताकि नए भवन की स्वीकृति दी जा सके। नोनी सुरक्षा योजना के अंतर्गत भी लक्ष्य 2600 के विरुद्ध 3108 हितग्राहियों को फायदा दिलाया गया है। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत जिले में अब तक 3 हजार 464 खाते खोले जा चुके हैं। ये सभी खाते पोस्ट आॅफिस में खुले हैं। बैंको की ओर से इस योजना के अंतर्गत असहयोग की बात सामने आई। छत्तीसगढ़ महिला कोष में अब तक लक्ष्य 153 के विरुद्ध 107 प्रकरण स्वीकृत किए जा चुके हैं। सक्षम योजना के अंतर्गत 18 लक्ष्य के विरुद्ध 24 महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण दिया गया है। कलेक्टर ने कहा कि डीएमएफ से भी सक्षम योजना के अंतर्गत महिलाओं को मदद दी जा सकती है। इसके लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

Source: 
visionnewsservice.in

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