गीला-सूख कचरा अलग-अलग देने आयुक्त ने की अपील

निगम क्षेत्र में निवासियों से गीला-सूख कचरा अलग-अलग देने महापौर चंद्रिका चंद्राकर और आयुक्त एस के सुन्दरानी ने अपील की है। घरों से दो प्रकार का कूड़ा निकलता है, एक गीला कचरा और एक सूखा कचरा। गीला कचरा जिसमें फलों के छिलके, कटी सब्जियां, और बचा हुआ खाना आदि होता है। सूखा कचरे जिसमें पॉलिथीन, कागज, पेकिंग मटेरियल आदि होते है। उन्होंने कहा गीला और सूखा कचरा आपस में मिलने से बदबू पैदा होता है और यह कूड़़ा किसी काम नहीं आता है।
यदि गीला कचरा और सूखा कचरा को स्त्रोत पर ही अलग-अलग कर दिया जाए तो गीले कचरे से खाद बनाई जा सकती है वहीं सूखे कचरे को रिसाइकल करके उपयोगी वस्तुएं बनाई जा सकती है। ऐसा करके हम कचरों के कारण पर्यावरण पर पडऩे वाले दुष्प्रभाव को कम कर सकते हैं और कचरों को भी उपयोगी बना सकते हैं। उन्होंने कहा स्वच्छ भारत मिशन के तहत गीला और सूखा कचरा के लिए अलग-अलग रंग के डिब्बे निर्धारित किया गया है। हरा डिब्बा-गीले कचरे के लिए है और नीला डिब्बा-सूखे कचरे के लिए निर्धारित है।

Source: 
Vision News Service

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