ढोलकल की पहाड़ियों तले जला अलाव , दिखा कसौली सा दृश्य

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स्वाधीनता दिवस की रात ढोलकल की पहाड़ियों तले मिनी कसौली उतर आया। कसौली और मनाली की तरह ही यहां कैंपों के चारों ओर अलाव जलाया गया। देर शाम से जश्न शुरू हुआ। दिल्ली के लोगों ने मीर और गालिब की शायरी की और फरसपाल के ग्रामीणों ने हल्बी-गोंडी गीतों से समां बांधा। ढोलकल ट्रैक और फूलपाड़ के लिए ट्रैकिंग के लिए 40 टूरिस्ट आए। इस आयोजन में पहली बार पर्वतारोहण विशेषज्ञ ने पर्यटकों को ढोलकल की ट्रैकिंग कराई और जरूरी टिप्स दिए।
00 बस्तर के लोकगीतों से लेकर शेर-ओ शाइरी का उठाया लुत्फ़ :
उल्लेखनीय है कि, नैना धाकड़ छत्तीसगढ़ की पहली महिला पर्वतारोही हैं। टूरिस्टों की टीम जब पहुंची तो उनका स्वागत फरसपाल में टूरिज्म के लिए प्रशिक्षित 25 युवकों ने पारंपरिक गोंडी तरीके से किया। ढोलकल और फरसपाल से उतरने के बाद कैंप में थोड़ा समय गुजारने के बाद सभी लोग अलाव जलाने के लिए आए। दिल्ली से आई पर्वतारोही निधि ने बताया कि, मैं मसूरी भी गई हूं और मनाली भी, लेकिन बस्तर में एक बात खास है यहां के लोगों में स्थानीयता बहुत नजर आती है। उनके गीतों को हमने सुना। सबसे पहले हमें आया मोचो दंतेसरी सुना। फिर स्थानीय विवाह गीतों को सुना। फिर हमें इसका मतलब भी बताया गया। गोंडी संस्कृति अपने आप में बहुत समृद्ध हैं। फिर हम दिल्ली वालों ने भी शायरी की महफिल सजाई। मीर की शायरी ने पूरा माहौल इतना खुशनुमा कर दिया कि मुझे गुलजार का वो गीत याद आ गया। निमी निमी ठंड और आग में, हौले हौले मारवा के राग में, मीर की बात हो।
00 पर्यटकों ने लिया चापड़ा चटनी का स्वाद :
इसके बाद बस्तरिया भोजन का आनंद लिया गया। चापड़ा चटनी सबसे विशिष्ट लगा। कोलकाता से आए आईटी इंजीनियर सोमनाथ ने बताया कि हमारा बंगाली खाना बहुत समृद्ध है और हम लोग नये टेस्ट के लिए काफी रुचि रखते हैं। अगर चापड़ा वहां भी मिलता तो निश्चित रूप से यह फूड भी मछली भात जैसा ही बंगाल में लोकप्रिय होता।
पुणे से आए आईटी इंजीनियर अनुराग ने बताया कि, पुणे के पास शिवाजी ने कई किले बनाए हुए हैं लेकिन बोनफायर और कैंप की वैसी सुविधा वहाँ उपलब्ध नहीं है। यह बहुत अच्छी बात है कि ढोलकल में इस तरह का आयोजन किया गया। यह जगह पर्यटन नक्शे में तेजी से उभरेगी क्योंकि यहाँ अब भी प्रकृति अपने मूल रूप में है हमारे मेजबानों ने हमें बताया कि, वे स्वतःस्फूर्त ढोलकल ट्रैक की सफाई भी करते हैं। ढोलकल ट्रैक के लिए देश भर के युवाओं को प्रेरित करने का कार्य अनएक्सप्लोर्ड बस्तर के जीत सिंह ने किया। जीत सिंह ने बताया कि, ढोलकल और फूलपाड़ में टूरिज्म की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्थानीय युवकों को प्रशिक्षण प्रदान किया।
00 ट्रैवल ब्लागर्स ने फैलाई ख्याति :
बारसूर महोत्सव के समय देश भर से जाने-माने ट्रैवल ब्लागर दंतेवाड़ा पहुंचे थे। उन्होंने अपने अनुभव अपने पाठकों से साझा किए। इसके बाद ढोलकल के प्रति पर्यटकों की रुचि तेजी से बढ़ी है। अब कैंप और बोनफायर जैसी सुविधाएं आरंभ होने से टूरिज्म के क्षेत्र में अच्छी संभावना ढोलकल के लिए पैदा होंगी।

Source: 
visionnewsservice.in

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