दीया ने युवाओं को बताया संस्कृति का महत्व

अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा संगठन दिव्य भारत युवा संघ छतीसगढ़ (दीया) की ओर से युवाओं को संस्कृति का महत्व बताया। जिला शिक्षा अधिकारी आशुतोष चावरे के निर्देशानुसार दुर्ग जिला के 169 स्कूल में डिवाइन वर्कशॉप करने के क्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जेवरा सिरसा भिलाई में और 11 अक्टूबर को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेक्टर 6 भिलाई नगर में व्यक्तित्व परिष्कार कार्यशाला हुई।
कार्यशाला में दीया वूमेन विंग की सुमन साहू ने उनके विषय युवा कौन, पर संबोधित करते हुए कहा कि हम जितने उन्नति और विकास की ओर आगे बढ़ रहे है उतनी ही हमारी युवा पीढ़ी के सामने समस्याओं का जन्म हो रहा है। इसका एक मात्र कारण है जीवन लक्ष्य का अभाव न कोई आदर्श है, न कोई उच्च उद्देश्य, टूटे सपने बिखरे अरमान, अतृप्त आकांक्षाओं से मारी युवा पीढ़ी है।
ऐसे में युवाओं के एक ही आदर्श हो सकते है स्वामी विवेकानंद। जो युवाओं को एक नई दिशा दिखा कर उनका मार्ग प्रशस्त कर सकते है। कार्यशाला के द्वितीय विषय युवाओ के दायित्व पर संबोधित करते हुए डॉ योगेंद्र कुमार ने कहा कि युवाओं को साधना के माध्यम से अपने अंदर के विकारों को दूर कर एवं अच्छाइयों को ग्रहण कर उसे समाज और परिवार निर्माण में लगाना चाहिए। क्योंकि युवा ही देश की नींव है और जब तक नींव मजबूत नहीं होगी इमारत (देश) कभी मजबूत नहीं बन सकता। साथ ही डॉ. ने बताया कि जहां एक ओर युवा नशा के गिरफ्त में है तो दूसरी ओर नारियों को भी उचित सम्मान नहीं मिल पा रहा है, पर्यवारण भी प्रदूषित होते जा रहा, शिक्षा से विद्या लुप्त हो रही है। ऐसे में हमें नशा उन्मूलन, नारी जागरण, पर्यावरण संवर्धन, शिक्षा में विद्या का समन्वय जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण कदम उठाना बहुत जरुरी है, यही वक्त की मांग भी है। तभी देश को पुन: जगत गुरु बन पाएगा। कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण विषय व्यक्तित्व परिष्कार पर दीया छतीसगढ़ के प्रभारी डॉ पी एल साव ने युवाओं को समय रहते अपने व्यक्तित्व को पहचानने के लिए आव्हान किया और कहा कि सुबह जिस इंसान को हम आइने में देखते है वैसा ही इंसान हमे जब हम स्कूल, कॉलेज बाजार या कही भी जाते है, तब दिखाई नहीं देता, क्यों, क्योंकि भगवान में आपके जैसा कोई बनाया ही नहीं है, इसलिए पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के इस वाक्य को अपने जीवन में उतारना कि अपना मूल्य समझो और विश्वास करो कि तुम संसार के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हो साथ ही एक प्रयोग करके समझाया कि जैसे मोमबत्ती को जलाओ तो उसका मोम निरंतर पिघलकर बत्ती को जलाते रहता है, उसे ऊपर उठाते रहता है, लेकिन यदि मोमबत्ती को उलट दिया जाए तो वही मोम उस मोमबत्ती को बुझा देता है। हमारा जीवन भी इसी मोमबत्ती की तरह है जब तक हम अच्छा सोचते है हम ऊपर उठते रहते है,पर जैसे ही हमारे मन में कुछ गलत या बुरे विचार आते है या विचार उल्टे हो जाते है मोमबत्ती की तरह की हमें बुझाने वाला या तबाह करने वाला कोई और नहीं होता हम खुद होते है। इसलिए हमें अपने जीवन को हमेशा सकारात्मक दिशा में ही ले जाना चाहिए।
इस कार्यशाला में शाला के प्राचार्य और सारे स्टाफ के सदस्यों के साथ 500 विद्यर्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन इंजीनियर सौरभ कान्त ने किया।

Source: 
Vision News Service

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