धान खरीदी की सीमा 25 क्विंटल प्रति एकड़ किए जाने की मांग

 धान खरीदी की सीमा 25 क्विंटल प्रति एकड़ किए जाने की मांग

प्रदेश शासन से धान खरीदी की तय सीमा बढ़ाकर 25 क्विंटल प्रति एकड़ किए जाने की मांग विधायक मोती लाल देवांगन ने की है जो कि जिले में प्रति एकड़ धान का वास्तविक उत्पादन है। जांजगीर-चांपा में सर्वाधिक धान उत्पादन होने के बावजूद प्रदेश शासन की ओर से प्रति एकड़ धान खरीदी की तय सीमा जो 15 क्विंटल प्रति एकड़ रखी गई है। यह किसानों के साथ एक प्रकार का अन्याय और शोषण है तथा व्यापारियों को सीधा लाभ पहुंचाने की सुनियोजित चाल है। बुधवार को ये बातें जांजगीर-चांपा विधायक मोतीलाल देवांगन ने यहां जारी एक बयान में कही।
00 क्यों पड़ेगी इसकी जरूरत :
उन्होंने कहा कि जब-जब चुनाव नजदीक आता है तब-तब प्रदेश की भाजपा सरकार को किसानों की सुध आती है और अन्नदाता किसानों को लुभाने का प्रयास किया जाता है। यही कारण है कि प्रदेश के किसानों को चार वर्ष की बजाय मात्र एक वर्ष का ही बोनस देकर उन्हें झुनझुना थमाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी तरह रमन सरकार द्वारा इस वर्ष धान खरीदी की सीमा 15 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित की गई है जबकि जिले में प्रति एकड़ औसतन 25 क्विंटल धान का उत्पादन होता है। इस तरह शेष 10 क्विंटल धान किसानों को बिचौलियों, व्यापारियों के हाथों समर्थन मूल्य के आधे दाम में विक्रय करने को मजबूर होना पड़ेगा। इससे किसानों का शोषण होने के साथ-साथ उन्हें पलायन की त्रासदी भी झेलनी पड़ती है। देवांगन ने प्रदेश शासन से धान खरीदी की तय सीमा बढ़ाकर 25 क्विंटल प्रति एकड़ किए जाने की मांग की है जो कि जिले में प्रति एकड़ धान का वास्तविक उत्पादन है। उन्होंने कहा कि यदि रमन सरकार किसानों की सचमुच हितैषी है तो वह धान खरीदी की तय सीमा बढ़ाने के अलावा किसानों को पूरे चार वर्ष का एकमुश्त बोनस प्रदान करें तभी वास्तव में किसानों को बोनस तिहार मनाने का अवसर मिलेगा।

Source: 
Vision News Service

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