नारायणपुर जिले के चार गांवो के ग्रामीण आश्रित बीजापुर जिले पर

नारायणपुर जिले के ओरछा ब्लाक के चार गांव के 1200 के लगभग ग्रामीण आज भी बीजापुर जिले पर आश्रित हैं। पत्रकारों का दल जब कवरेज के लिए बेदरे गया तो वँहा कुछ ग्रामीण राशन लेकर नदी की तरफ जाते नजर आए। तो पत्रकारों का दल भी इंद्रावती नदी के तट पर गया तो देखा कि ग्रामीण बड़ी परेशानी से नदी पार कर चावल सहित अन्य राशन सामग्री लेकर जा रहे थे। पूछने पर ग्रामीणों ने बताया की वो नारायणपुर जिले के है लेकिन उनका राशन बेदरे में ही मिलता है। इस दौरान वँहा लंका बालक आश्रम के अधीक्षक पण्डाराम भी अपने 50 सीटर आश्रम के लिए कुछ बच्चों के साथ आये हुए थे। उन्होंने बताया कि हमारा ओरछा होते हुए नारायणपुर जाने का कोई मार्ग नहीं है। सिर्फ पगडंडी है जिससे वो पैदल चल कर कभी कभार 65 किलोमीटर दूर ओरछा जाते हैं। जबकि नारायणपुर यंहा से 130 किलोमीटर दूर है।
अधीक्षक ने बताया कि लंका के अलावा पदमेटा ,करागुर ,डोडी मरका भी शामिल है। इन गांवों में नारायणपुर जिले के छोटे अधिकारीयों का साल में एक दौर बड़ी मुश्किल से होता है।
00 जिला मुख्यालय दूर होने से इन समस्याओं का करना पड़ रहा है सामना
शिक्षा लंका सहित इन चार गांवों के लिए एक मात्र बालक आश्रम है जिसमे अधीक्षक एंव एक अन्य शिक्षक इनको पढ़ाते है वन्ही इन क्षेत्रों की बालिकाओं के लिए किसी भी प्रकार के आश्रम सुविधा नहीं। जिसके चलते आज भी 50 से ज्यादा लड़कियां पढऩा चाहते हुए नहीं पढ़ पा रही हैं। अनपढ़ रहकर घर मे ही काम करती हैं। 5 -6 लडकिया बीजापुर जिले के बेदरे पोटाकेबिन में रहकर पढ़ाई कर रही है, बालक आश्रम के अधीक्षक को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राशन लेने आते हैं बेदरे तो अन्य राशन और सब्जियां लेने जाते हैं। 30 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के भामरागढ़ , अधीक्षक को अपना वेतन लेने के भी लिए बीजापुर से जगदलपुर होते हुए नारायणपुर जाने 315 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है। बारिश के समय होती है ज्यादा परेशानी दो से तीन महीने का राशन जमा करके पहले से रखना पड़ता है।
00 स्वास्थ्य
इंद्रावती नदी के तट पर स्थित लंका सहित इन चार गांवों के ग्रामीण स्वास्थ्य के मामले में भी नारायणपुर जिले से कोसो दूर है। यंहा अभी भी कई ग्रामीणों के चेहरे एलर्जी के चलते फूल रहे है जबकि नारायणपुर जिला प्रशासन इससे से अनजान है । अब तक कोई भी स्वास्थ्य अमला यंहा जांच करने नही पंहुचा, साथ ही यहां कभी भी बीमार होने पर लोग बीजापुर के कुटरू अस्पताल आते हैं या फिर महाराष्ट्र के भामरागढ़ के पास किसी आपटे आश्रम में जाते हैं। जहां संचालित छोटे से चिकित्सालय में उनका मामूली बीमारियों का इलाज हो जाता है, जबकि आज भी इन गांवों के ग्रामीण शासन की महतारी एक्सप्रेस, 108 एम्बुलेंस की सुविधाओं से कोसो दूर हैं।
00 बिजली :
लंका, करागुर, पदमेटा, डोडी मरका के गांवों में आजादी के बाद आज तक बिजली के खम्भे नही लग पाये यंहा चुनिंदा घरों में सौलर ऊर्जा के इस्तेमाल कर अपने घरों को रोशन कर रहे है वन्ही अधिकांश घर अंधेरे में है। वहीं इन गांवों के कई ग्रामीणों ने कहा कि उनके इन चार गांवों को नारायणपुर से अलग कर बीजापुर जिले में मिला देना चाहिए ताकि उनको कई समस्याओं की मांगों को लेकर 315 किलोमीटर दूर नारायणपुर नहीं जाना पड़ेगा उनके इन गांवों से बीजापुर की दूरी मात्र 65 किलोमीटर ही पड़ेगी। यहां आकर वो अपने सभी सरकारी एंव बैंक के काम भी आसानी से कर पाएंगे।
पत्रकारों के इंद्रावती नदी के पास पंहुच ग्रामीणों से चर्चा करने के दौरान बीजापुर कलेक्टर के डी कुंजाम ओर पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग भी नदी के पास आकस्मिक निरीक्षण करने पंहुचे उन्होंने भी ग्रामीणों से चर्चा की ओर उनकी समस्याओं से अवगत हुए इस दौरान बीजापुर जिले के आला ने भी ग्रामीणों की समस्याओं को सही पाया लेकिन अन्य जिले का मामला होने के बावजूद भी उन्होंने ग्रामीणों से कहा की आप लोग किसी भी उपचार के लिए कभी कुटरू अस्पताल आये वहां उनका निशुल्क उपचार होगा साथ ही अपनी बालिकाओं को अनपढ़ मत रखो उनको बेदरे के पोटाकेबिन में पढऩे के लिए भेजो यंहा उनको रखा जायेगा। इस दौरान कलेक्टर के डी कुंजाम ने ग्रामीणों को नदी में आने जाने वाली परेशानी को देखते हुए नदी पर पुल निर्माण करने के लिए भी कोशिश की जाएगी।

Source: 
visionnewsservice.in

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