पुलिस को बाल अपराध की जांच संवेदनशीलता से करनी चाहिए-प्रभा दुबे

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष प्रभा दुबे ने बुधवार को ‘बाल हितैषी पुलिसिंग’ विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि पुलिस को बाल अपराध मामलों की जांच और विवेचना सरलता, संवेदनशीलता और शालीनता से करना चाहिए। पुलिस के इस सरल व्यवहार से बहुत से अपराधी प्रवृत्ति के बच्चे भी समाज की मुख्य धारा में आ सकते हैं और उनको नया जीवन मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि पुलिस मुख्यालय छत्तीसगढ़ (अपराध अनुसंधान विभाग) और यूनीसेफ के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन स्थानीय होटल कोर्टयाड मैरिएट में किया गया था। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ सहित नौ राज्यों से आए बाल संरक्षण विशेषज्ञ और पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला के समापन अवसर पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य यशवंत जैन ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को बाल अधिकार संरक्षण के लिए बनाए गए नियम-कानूनों जैसे जेजेएक्ट और पाक्सो एक्ट के बारे में बुनियादी प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बाल अपराधों की रोकथाम से संबंधित इन कानूनों में छोटे-छोटे सरल प्रावधानों का समावेश किया गया है, जिसके पढ़ने और समझने से बाल अपराध को रोकने में सफलता मिलेगी।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध अनुसंधान विभाग) अरूणदेव गौतम ने तीन दिवसीय कार्यशाला में भाग लेने आए पुलिस अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बच्चों से संबंधित अपराध और उसके रोकथाम के विषय में पुलिस अधिकारी को बहुत संवेदनशील होना होगा। सामान्य पुलिसिंग में अपराधियों के प्रति और कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस को सख्ती से कार्यवाही करनी पड़ती है, परन्तु एक बालक भले ही वह अपराध किया हो, उसके प्रति पुलिस को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए। जैसे कि एक पुलिस अधिकारी स्वयं के बच्चे के साथ व्यवहार कर रहा हो और इस कार्य में पुलिस को बच्चे के माता-पिता, अभिभावक, समाज और उसके शिक्षण संस्थानों का भी सहयोग लेना पड़ सकता है। गौतम ने कहा कि पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली के अनुरूप अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए इनाम, प्रोत्साहन राशि और दण्ड के बहुत से प्रावधान है, परन्तु पुलिस अधिकारियों की ओर से अच्छा कार्य किए जाने पर हमारे समाज के लोगों, आम नागरिकों का प्रोत्साहन पुलिस के लिए सबसे बड़ा इनाम है। गौतम ने कार्यशाला की सफलता पर आशा व्यक्त किया कि इस मंथन और जो तथ्य निकलकर आएंगे, उनका समावेश छत्तीसगढ़ पुलिस अकादमी और पुलिस प्रशिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

Source: 
visionnewsservice.in

Related News