प्राइवेट स्कूल की मनमानी : स्कूल प्रबंधन ने कक्षा 10 वीं के दिव्यांग बच्चे का काटा टीसी, छात्र दुकान चलाने को मजबूर, यह रही वजह…

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गरियाबंद. जिले में एक प्राइवेट स्कूल की मनमानी ने दिव्यांग छात्र का भविष्य खतरे में पड़ गया है. बिना सहमति के डोहेल में संचालित बीएचएन शाला प्रबंधन ने दिव्यांग छात्र को स्कूल से बेदखल कर दिया है. वजह पूछने गए पिता को टीसी थमाने की पहले कोशिस की गई. इंकार किया तो डाक से भेज दिया. बेटे के भविष्य दांव पर लगते देख पिता सरकारी दफ्तर व प्रबंधन का चक्कर लगा रहे है. प्राचार्य बोले तीन साल में कभी भी समय पर फ़ीस नहीं चुकाया. डीईओ बोले निकालने का ये कोई ठोस वजह नहीं है. कानून के मुताबिक पालक की सहमति या मांग पर टीसी दिया जाता है. पिता ने कहा बेटे को न्याय नहीं मिला तो कोर्ट की शरण में जाऊंगा.

डाक के जरिए टीसी काटकर भेजा घर
यहां के डोहेल में संचालित भारतमाता हाई स्कूल में कोदोबेड़ा निवासी शोभाचन्द्र पात्र का बेटा योगेन्द्र पिछले तीन साल से पढ़ाई कर रहा था. पिता ने बताया दिव्यांग बेटा इस साल नवमी पास किया था. 10 वीं क्लास कुछ दिन आने के बाद प्रबंधन ने बस स्टॉप से कह कर उसे स्कूल लाने को मना कर दिया. शोभाचन्द ने बताया कि उसके द्वारा विलम्ब शुल्क समेत स्कूल से चाही गई पूरी शुल्क जमा कराया गया है. फिर भी संस्था जुलाई माह के पहले सप्ताह से बेटे को स्कूल आकर क्लास में बैठने से मना कर दिया. 10वीं बोर्ड के लिए पिता इसी बीएचएन स्कूल में पढ़ाना चाह रहे थे. लेकिन संस्था बेटे के नाम खारिज कर टीसी पकड़ाने में उतारू हो गया. और डाक के जरिए टीसी काटकर घर में भेज दिया गया है.

छात्र दुकान चलाने पर मजबूर
शोभाचन्द ने बताया कि वो कारण पूछने के लिये लगातार एक सप्ताह तक स्कूल का चक्कर काटता रहा, कारण बताने न तो प्राचार्य सामने आए न ही डायरेक्टर. परेशान होने के बाद शोभाचन्द ने बीईओ प्रदीप शर्मा से घटना क्रम को अवगत कराकर कारण पूछने के अलावा स्कूल में भर्ती दिलाने की मांग पत्र सौंपा है. दाखिले के अभाव में दिव्यांग पिता के साथ किराने की दुकान चलाने पर मजबूर है.

संस्था पर लगाया जा रहा झूठा आरोप
मामले में जंहा संस्था के प्राचार्य अनिता दास ने कहा कि-

“पालक शिकायती प्रवृत्ति का है. पिछले तीन साल में कभी भी नियमित फीस नहीं दिया गया. बार-बार फीस मांगने पर कई मर्तबा प्रबंधन व संस्था के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर शिकायत करता था. सार्वजनिक मंच पर संस्था को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ा था. इसलिय बच्चे को इस साल प्रवेश नहीं देने का निर्णय लिया गया है”.

कारण ठोस नहीं
वहीं डीईओ एसएल ओगरे ने कहा कि-

“कारण ठोस नहीं है पालक के सहमति के बगैर कोई भी संस्था इस तरह से बेदखल नहीं कर सकता है. पत्र जारी कर भर्ती लेने निर्देश दिया जाएगा. ऐसा नहीं हुआ तो नियमानुसार कार्रवाई भी होगी”.

पहले भी स्कूल 20 बच्चों को बरामदे किया था खड़ा
छात्र की मां उर्मिला पात्र जिला पंचायत सदस्य है. इसी नाते पिछले सत्र में पालकों ने 20 बच्चों को बरामदे में चार घण्टे तक खड़े करने की शिकायत उर्मिला की किया गया था. पालको की शिकायत पर उर्मिला ने कार्यवाही के लिये पत्र जिला अधीकारियों को जारी किया था. पति शोभाचन्द ने बताया फीस नहीं पटाने के कारण प्रबन्धन द्वारा 20 बच्चों को बाहर खड़े करने की शिकायत पर कार्यवाही तो नहीं हुई, लेकिन इसी रंजिश के चलते बेटे को बेदखल कर दिया गया. शोभचन्द्र बोले बेटे को न्याय नही मिला तो कोर्ट की शरण में जाऊंगा.

Source: 
lalluram.com

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