प्राथमिक शाला के बच्चों को पढ़ाता है तीसरी कक्षा का छात्र

शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर धत्ता बता रहे शिक्षा विभाग की असलियत ये है कि जिले के बडे गुरबे की प्राथमिक शाला में तीसरी का छात्र बसंत बच्चों को पढ़ाता है। इस शाला में कुल दस बच्चे पढ़ते हैं। यहां कोई भी अध्यापक पदस्थ नहीं है। यही हाल बोदारस पंचायत की माध्यमिक शाला बूटापारा का भी है। यहां भी कोई शिक्षक पदस्थ नहीं है। जब कि यहां वर्तमान में 8 बच्चे अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। जिले में शिक्षा का हाल ये है कि कहीं चपरासी तो कहीं रसोइये के भरोसे पाठशालाएं चल रही हैं। तो अब वहीं बस्तर के संभाग आयुक्त दिलीप वासनीकर कलेक्टर से बात करके इसको सुधारने का आश्वासन दे रहे हैं। सवाल तो ये है कि एक ओर जहां राज्य के प्रशासनिक अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेज रहे हैं तो वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने खुद को न बदलने की कसम खा रखी है। ऐसे में प्रदेश के बच्चों के भविष्य का तो भगवान ही मालिक है।
क्या है पूरा मामला:
राष्ट्रीय राजमार्ग 30 से महज 6 किमी. दूर स्थित प्राथमिक शाला बड़े गुरबे गांव जहां कि स्कूल की स्थिति बहुत ही खराब है। जिस पंचायत में करीब 1800 की जनसंख्या है। इस स्कूल में पिछले वर्ष करीब 40 बच्चे थे, लेकिन पिछले दो सालों से यहां शिक्षक नहीं है। पिछले सत्र में एक शिक्षक के संलग्र कर दिया गया था लेकिन वो कभी-कभी आता था। इस वर्ष उस शिक्षक को भी मूल पद पर भेज दिया गया। शिक्षक नहीं होने के कारण इस वर्ष महज 20 बच्चों ने प्रवेश लिया। ये बच्चे मध्यान भोजन खाने स्कूल आते हैं। ग्रामीणों ने भी कई बार शिकायत दर्ज करवाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। वहां अध्यनरत सभी छात्र-छात्राओं में पढऩे की ललक है। बिना शिक्षक के भी वो पढाई कर रहे हैं। वही शिक्षक अभाव में कुछ बच्चे बाहर खेल रहे हैं। बच्चों ने बताया कि कुछ बच्चे स्कूल आकर मध्यान भोजन करने के बाद खेतों में अपने मां-बाप का हाथ बंटाने चले जाते हैं। कुछ साल पहले सरकार ने इसके भवन की मरम्मत के लिए एक लाख रुपए की राशि भी दी थी, मगर भवन जस का तस ही रह गया।
दूसरी स्कूल जो बोदारस पंचायत स्थित माध्यमिक शाला बूटापारा जहां पिछले तीन सालों से स्कूल नहीं लगता है । सरकार स्कूल खोलकर शिक्षक भेजना भूल गई। वहां प्राथमिक व माघ्यमिक शाला के अलग-अलग भवन बने हुए हैं। रसोईया दुलाराम कवासी ने बताया कि प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक कभी-कभी इन बच्चों को पढ़ा लेते हैं। माध्यमिक शाला में पिछले साल 20 बच्चे थे, लेकिन इस साल 8 बच्चे अध्यनरत हैं।
तीसरी कक्षा का छात्र बसंत पिता हुंगा जो अपने साथियों को पढ़ा रहा है। उसने बताया कि बहुत दिन हो गए गुरूजी को आए। उसने कहा कि मैं और मेरे साथी गांव से आऐ छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाते हैं। सरपंच पति आयताराम मण्डावी नेे कहा कि पिछले दो सालों से शिक्षक नहीं है। पिछले साल एक शिक्षक को संल्गन किया गया था, लेकिन वो भी कभी-कभी आते थे। उनको भी वापस मूल स्कूल में भेज दिया गया। इस सत्र में कोई शिक्षक नहीं है। कई बार शिकायत दर्ज करवाई गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके कारण कई बच्चे स्कूल छोड़ रहे हंै।

Source: 
visionnewsservice.in

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