बस्तर में शुरू हुआ मेले-मड़ई का दौर

बस्तर में इन दिनों पारंपरिक दियारी त्यौहार की धूम है। अंचल के गांवों में साप्ताहिक हाट बाजारों के एक दिन पूर्व दियारी मनाया जाती है। दियारी त्यौहार के साथ ही विभिन्न ग्रामों में मडई मेला का दौर भी प्रारंभ हो जाता है, जो फागुन मड़ई पर जाकर समाप्त होगा। दियारी के चलते मांस व मदिरा की बिक्री बढ़ गई है। इस दिन लोग अपने खेती-किसानी से फुरसत होकर अपने गाय-बैलों की पूजा करते हैं तथा अपने परिवार के साथ-साथ गांव वालों के संग सामूहिक रूप से दियारी मनाते हैं। यहां यह देखा जाना होगा कि दक्षिण बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मनाये जाने वाले दियारी और मडई मेले का आयोजन इस नव वर्ष पर कैसे मनाया जाता है। वैसे तो दियारी की परम्परा छत्तीसगढ़ में बहुत पुरानी है। खलिहान से फसल कटने के बाद जब अन्न घरों में आ जाता है तथा खेती-किसानी से फुरसत मिल जाती है। वहीं दूसरी ओर खेती में काम आने वाले पशुओं को भी आराम मिल जाता है। बस्तर के अंचल में कृषकों का मानना है कि वर्ष भर जो पशु उनके खेती किसानी में मदद करते हैं उन्हें दियारी के दिन पूजा-अर्चना कर उन्हें सम्मान दिया जाता है। कृषक इस दिन अपने इष्टï देवी-देवताओं का भी स्मरण करते हैं तथा गांव वालों के साथ दियारी मनाते हैं। इन दिनों बस्तर जिले के विभिन्न गांवों में अलग-अलग दिनों में दियारी मनाया जा रहा है।
इन दिन बड़े-बुजुर्ग मांस-मदिरा का भी सेवन करते हैं। दियारी के साथ कहीं-कहीं दूसरी दिन मेले-मड़ई का भी आयोजन किया जाता है। दियारी के बाद जिले के कई गांवों में मेले-मड़ई का भी आयोजन जोरों पर है, जो अंत में दंतेवाड़ा जिले के फागुन मडई पर जाकर समाप्त होता है।

Source: 
visionnewsservice.in

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