राजधानी में ही सरकार के आदेश की निजी अस्पताल ने उड़ाई धज्जियां, बिल के लिए डेंगू पीड़िता का शव को देने से किया इंकार

राजधानी में ही सरकार के आदेश की निजी अस्पताल ने उड़ाई धज्जियां, बिल के लिए डेंगू पीड़िता का शव को देने से किया इंकार

प्रदेश में डेंगू से दर्जन भर से ज्यादा मौत हो चुकी है. मौतों के साथ ही डेंगू पीड़ित मरीजों की बढ़ती संख्या के बाद प्रदेश सरकार ने सभी अस्पतालों में निशुल्क ईलाज किए जाने का आदेश जारी किया गया था लेकिन सरकार के इस आदेश की धज्जियां राजधानी में ही उड़ाई जा रही है. भिलाई की एक युवती रजनी सुनानी की इलाज के दौरान रामकृष्ण केयर अस्पताल में मौत हो गई लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने बिल का पूरा पैसा पटाए बगैर युवती का शव देने से इंकार कर दिया.

भिलाई में सबसे ज्यादा डेंगू से प्रभावित इलाके बापू नगर स्थित जलाराम मंदिर के पास रहने वाली 27 वर्षीय युवती रजनी सुनानी को राजधानी के राम कृष्ण केयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां उन्हें गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती किया गया था. कल देर रात रजनी की इलाज के दौरान मौत हो गई. युवती की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें 1 लाख 60 हजार रुपए का लंबा बिल थमा दिया.

अस्पताल प्रबंधन ने शोक में डूबे इस परिवार को शव देने से इंकार कर दिया उन्होंने कहा कि जब तक बिल का सारा पैसा जमा नहीं कराया जाएगा तब तक उन्हें शव नहीं दिया जाएगा. परेशान परिवार ने इसकी जानकारी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के दक्षिण भारतीय समाज विभाग के प्रदेशाध्यक्ष को दी. उन्होंने दुर्ग कलेक्टर उमेश अग्रवाल को पूरे मामले से अवगत कराया. जिसके बाद दुर्ग कलेक्टर ने राम कृष्ण केयर अस्पताल प्रबंधन को जमकर फटकार लगाई और उन्हें बिल माफ करने की हिदायत दी. इसके साथ ही उन्होंने शव को परिजनों को सौंपने के लिए अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिया. जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को शव सौंप दिया. बताया जा रहा है कि मृतिका के परिवार की आर्थिक स्थितियां अच्छी नहीं है. पिता वृद्ध हैं और भाई भिलाई के किसी निजी कंपनी में मजदूरी करते हैं.

ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सरकार ने स्मार्ट कार्ड और संजीवनी कोष के माध्यम से मुफ्त इलाज किए जाने का आदेश दिया है तो फिर निजी अस्पताल मरीजों के परिजनों से पैसों की डिमांड क्यों कर रहे हैं.

Source: 
lalluram.com

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