रिहायशी क्षेत्र में कोल साईडिंग से लोग परेशान

रिहायशी क्षेत्र में कोल साईडिंग से लोग परेशान

नगर में रेलवे फाटक के पास कोल साईडिंग से लोग परेशान हैं। यहां रोजाना बड़ी संख्या में भारी वाहनों से दीपका, गेवरा से कोयला लोडकर ट्रेन के माध्यम से अन्यत्र भेजा जाता है, मगर विभागीय उदासीनता व ठेकेदारों की मनमानी के चलते वार्डवासियों का जीना दूभर है। लगातार वार्डवासियों की ओर से इसकी शिकायत कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों से की जा रही है, बावजूद अब तक कोई सार्थक पहल नहीं होने पर वार्डवासियों में आक्रोश पनप रहा है।
औद्योगिकीकरण के चलते लगातार जिले में पावर प्लांटों सहित अन्य उद्योगों की संख्या बढऩे लगी है, मगर विभगीय उदासीनता व प्रबंधन के मनमाने रवैये से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में लगातार पावर प्लांटों की संख्या बढऩे व कोरबा स्थित कोयला खदान नजदीक होने के चलते दिन ब दिन नए-नए कोल डिपो व वासरी खोलकर इसका संचालन किया जा रहा है। शासन के निर्देशानुसार सभी डिपो संचालकों को निर्धारित मापदण्डों के अनुरूप डिपो का संचालन कराया जाना है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते डिपो संचालकों की ओर से मनमाने ढंग से इसका संचालन किया जा है। हावड़ा-मुम्बई रेल मार्ग व दीपका खदान नजदीक होने के चलते जिले के अकलतरा व जांजगीर में कोल साइडिंग का संचालन किया जा रहा है। कोल साइडिंग होने के चलते रोजाना नैला व अकलतरा रेलवे साइडिंग में भारी वाहनों का दबाव बनने लगा है। जिला मुख्यालय के नैला रेलवे स्टेशन के पास कोल साइडिंग का संचालन किया जा रहा है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में भारी वाहन दीपका, गेवरा से कोयला लोड कर कोल साइडिंग में यहां पहुंचते हैं, यहां कंपनी की ओर से उन्हें मालगाड़ी के माध्यम से अन्यत्र भेजा जाता है, मगर साइडिंग प्रबंधन की उदासीनता का खामियाजा नगरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। यहां बड़ी संख्या में कोयला लोड व अनलोड किया जाता है। इसके चलते कोल साइडिंग के पास रहने वाले लोग कोयले के डस्ट से परेशान हैं। रेलवे साइडिंग लोगों के लिए मुसीबत बनने लगा है। हालांकि इस संबंध में कई बार वार्डवासियों की ओर से इसकी शिकायत कलेक्टर सहित अन्य संबंधित अधिकारियों की गई, बावजूद इसके अब तक इस ओर कोई पहल नहीं हो सकी है। इससे वार्डवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
00 क्या कहते हैं वार्डवासी
इस संबंध में नगर पालिका जांजगीर नैला के वार्ड नंबर 3 निवासी रामरतन सूर्यवंशी का कहना है कि मोहल्ले में कई परिवार रहते हैं। मोहल्ले में पहुंच मार्ग केवल रेलवे साइडिंग ही है। इसी लिए मोहल्लेवासियों को इसी मार्ग से होकर आना-जाना करना पड़ता है। कोल साइडिंग होने के चलते यहां रोजाना बड़ी संख्या में भारी वाहनों का दबाव बना रहता है। इसके चलते लोगों को जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ रहा है। वार्ड की रामेश्वरी बाई का कहना है कि कोल साइडिंग होने के चलते यहां पूरे दिन कोयले का चूरा व धूल के गुबार उड़ते रहते हैं। इससे मोहल्लेवासी परेशान हैं। छोटे लाल कश्यप का कहना है कि कोल साइडिंग में रोजाना पानी का छिड़काव नहीं किया जाता है। इसके चलते यहां पूरे दिन भर धूल के गुबार उड़ते रहे हैं।

Source: 
visionnewsservice.in

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