लाखों खर्च करने के बाद भी घट गई पहाड़ी मैना की आबादी

प्रदेश के राजकीय पक्षी के रूप में मान्यता प्राप्त बोलने वाली पहाड़ी मैना की आबादी लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी घट गई। स्थानीय वन महाविद्यालय में एक विशलकाय पिंजरा बनाकर साल वृक्ष में लगाया गया था और वर्ष 2002 में इसे पहाड़ी मैना की आबादी बढ़ाने प्रजनन केंद्र का दर्जा दिया गया था। उस समय कुल 6 पहाड़ी मैना को रखा गया था। इनके संवर्धन व विकास के लिए लाखों रुपए खर्च भी अभी तक किये जा चुके हैं, लेकिन वर्ष बीतने के बाद भी छह पहाड़ी मैना में से अभी वर्तमान में केवल एक ही पहाड़ी मैना बची है और अभी भी यह कौन सी पहाड़ी मैना है यह बता पाने में विभाग असमर्थ साबित हो रहा है।
इस पहाड़ी मैना की विशेषता यह है कि यह मनुष्य की आवाज की बिल्कुल उसी प्रकार नकल कर निकालती है, जिस प्रकार मनुष्य ने कहा है। बस्तर में पहले यह पर्याप्त मात्रा में मिल जाया करती थी, लेकिन अब इसकी संख्या बहुत ही कम हो गई है। इसकी आबादी बढ़ाने के लिए वन विभाग के माध्यम से शासन ने पहल की और उसके बाद यहां वन विद्यालय में इसके संवर्धन के प्रति ध्यान दिया गया। आज यह सारे प्रयास असफल हो चुके हैं। इस संबंध में विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी मैना का प्रजनन व संरक्षण प्राकृतिक रूप में संभव है और इस प्रकार से उपाय करने से कुछ भी हासिल नहीं होगा। बस्तर संभाग में यह पहाड़ी मैना माचकोट, कोलेंग, बारसूर, बैलाडीला और ओरछा सहित अबुझमाड़ के दूसरे हिस्सों में देखी जा सकती है, लेकिन इसके लिए भी काफी प्रयास करने पड़ते हैं।

Source: 
visionnewsservice.in

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