वंडर ब्वॉय चेंदरू को भूला प्रशासन, मंत्री जी की घोषणा भी बस रह गई घोषणा

Wonder Boy Chendaru

नियाभर में बस्तर टाइगर और वंडर ब्वॉय के नाम से मशहूर चेंदरू मंडावी के निधन को करीब 4 साल का वक्त बीत गया, लेकिन आज तक उनकी प्रतिमा स्थापित करने का ऐलान बस ऐलान ही बनकर रह गया. टाइगर ब्वॉय चेंदरू का निधन 18 सितंबर 2013 को हो गया था. इसके बाद इनकी यादों को संजोए रखने के लिए इनकी प्रतिमा स्थापित करने का ऐलान किया गया था.

घोषणा रह गई घोषणा

करीब 3 साल पहले छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप ने चेंदरू मंडावी की प्रतिमा को जिले में स्थापित करने की घोषणा की थी. लेकिन इस पर कोई अमल नहीं किया गया. इससे चेंदरू का परिवार खफा है. उन्होंने शासन-प्रशासन पर अनदेखी का आरोप भी लगाया था.

बस्तर का ‘मोगली’ चेंदरू मंडावी

गौरतलब है कि 60 के दशक में लंदन से आई एक टीम ने अबुझमाड़ के जंगलों में चेंदरू मंडावी को लेकर ‘द जंगल सागा’ नाम की अंग्रेज़ी डाक्यूमेंट्र्री फिल्म बनाई थी. दरअसल इस आदिवासी बच्चे चेंदरू की एक बाघ के साथ ऐसी दोस्ती हो गई थी कि वो उसी के साथ खाता-पीता, खेलता और सोता था. इसी रियल स्टोरी पर स्वीडिश डायरेक्टर ने ‘द जंगल सागा’ फिल्म बनाई थी. इस फिल्म से चेंदरू रातोंरात इंटरनेशनल ‘स्टार’ बन गया था. फिल्म को 1958 में कान फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया.

चेंदरू मंडावी पर एक फोटो फीचर भी लंदन पैलेस के कोलिंस स्‍टीफन जैम्‍प्‍स ने तैयार की थी.

बाघ से थी चेंदरू की दोस्ती

मुरिया जनजाति का चेंदरू नारायणपुर के गढ़बेंगाल गांव का रहने वाला था. बचपन में ही उसके पिता और दादा ने एक बाघ का बच्चा लाकर उसे दिया, तो चेंदरू उसी के साथ दोस्त की तरह रहने लगा था. वो बाघ को प्यार से ‘टेम्बू’ बुलाता था.

आखिरी वक्त में अकेला रहा चेंदरू

चेंदरू को 23 सितंबर 2011 में पैरालिसिस अटैक हुआ था. तंगहाली में परिवार ने जैसे-तैसे इलाज कराना शुरू किया, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और 2013 में उसकी मौत हो गई.

Source: 
Lalluram News

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