विधिक साक्षरता शिविर में दी कानून की जानकारी

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव की ओर से 29 नवम्बर को शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अंजली सिंह ने बताया कि वर्तमान में बच्चों के साथ अनेक अनैतिक घटनाएं घट रही है। ऐसे में बच्चों को चाहिए कि वे अपने साथ घटी घटना को अपने घर के माता-पिता अथवा किसी परिचित व्यक्ति को बताए। जिससे कि अपराधी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे दण्डित कराया जा सके। बच्चों के साथ घटने वाली अनैतिक घटना बालकों का लैगिंग उत्पीडऩ अधिनियम 2012 (पाक्सो एक्ट) के अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है। जिसमें कठोर दण्ड का प्रावधान है और वर्तमान में बढ़ रहे बलात्कार के मामलों में जानकारी भी दी गई। मोटरयान अधिनियम के अंतर्गत बताया गया कि 18 वर्ष की कम उम्र की बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति नहीं होती है। उन्होंने कहा कि18 वर्ष बाद भी ड्रायविंग लायसेंस बनाकर और वाहन का बीमा कराकर वाहन चलाना चाहिए।
उन्होंने घरेलू हिंसा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि परिवार में किसी महिला स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना, शारीरिक, मानसिक अथवा आर्थिक रूप से प्रताडि़त करना और भावनात्मक दुरुपयोग करना घरेलू हिंसा का कृत्य है। इस अधिनियम की धारा अंतर्गत नियुक्त संरक्षण अधिकारी को अथवा क्षेत्राधिकार के अंतर्गत पुलिस थाना को अथवा मजिस्ट्रेट को घरेलू हिंसा संबंधी कृत्य के संबंध में रिपोर्ट करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में महिलाओं और अन्य श्रेणियों में विधिक सहायता का प्रावधान है। शिविर में शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के प्रोफेसर प्रीतीबाला टांक, प्रो. डॉ. मीना प्रसाद, डॉ. अंजना ठाकुर, डॉ. अनिता शंकर, डॉ. दिव्या देशपांडे, सुमन बोथरा, कविता साकुरे, मंजरी सिंह, डॉ. अनिता शाह, डॉ. प्रियंका सिंह, रीना साहू, ललिता साहू और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण स्टॉफ उपस्थित थे।

Source: 
visionnewsservice.in

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