शौचालय उपयोग के लिए प्रेरित करना सामाजिक दायित्व: कलेक्टर

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लोगों को खुले में शौच की आदत से छुटकारा दिलाकर शौचालय उपयोग के लिए प्रेरित करना सभी का सामाजिक दायित्व। गुरुवार को ये बातें कलेक्टर धनंजय देवांगन ने कार्यालय में समीक्षा बैठक के दौरान कही। उन्होंने कहा कि खुले में शौच की प्रवृत्ति सदियों पुरानी है। लोगों को इस आदत से छुटकारा दिलाना आवश्यक है।
खुले में शौच से कई बीमारियां होती हैं, जिसका प्रभाव परिवार और पूरे गांव में पड़ता है। शौचालय के उपयोग से घर के बड़े बुजुर्गों से लेकर छोटे-छोटे बच्चों को सुविधा होगी। वहीं घर की महिलाओं को भी खुले में शौच जाने से आजादी मिलेगी। सती प्रथा और टोनही प्रथा की तरह इस बुराई का अंत भी आवश्यक है, जिससे गांव-गांव में स्वच्छता और अच्छे स्वास्थ्य का वातावरण बन सके।
कलेक्टर ने ग्राम पंचायत वार निर्माणाधीन शौचालयों की जानकारी ली और अपूर्ण कार्यों को शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने शौचालय निर्माण की धीमी गति के कारण तकनीकी सहायक अनुप साहा और जय नाग से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए, वहीं रिंकी बघेल के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने खुले में शौच मुक्त घोषित हो चुके ग्रामों में शौचालय का शत-प्रतिशत उपयोग करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव को स्वच्छ और स्वस्थरखना सभी की जिम्मेदारी है तथा इस कार्य में राजस्व विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को शौचालय के उपयोग के लिए प्रेरित करें।
इस अवसर पर सहायक कलेक्टर राहुल देव, सहायक आयुक्त गायत्री नेताम, जिला शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र झा, जिला कार्यक्रम अधिकारी सुशैल ठाकुर, कृषि विभाग के उप संचालक कपिलदेव दीपक, कार्यपालन अभियंता नदीम पाशा, मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेन्द्र नाग, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनिल ठोमरे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित थे

Source: 
visionnewsservice.in

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