सरकार और शिक्षाकर्मियों की हठधर्मिता का खामियाजा भुगत रहे विद्यार्थी

  सरकार और शिक्षाकर्मियों की हठधर्मिता का खामियाजा भुगत रहे विद्यार्थी

सरकार और शिक्षाकर्मियों के बीच नूरा-कुश्ती का खेल नई बात नहीं है, संविलियन को लेकर शिक्षाकर्मी आंदोलन पर बैठे हैं। तो सरकार भी उनकी मांगों को पूरा करने कोई दिलचस्पी भी नहीं दिखा रही है। सरकार और शिक्षाकर्मियों की हठधर्मिता का खामियाजा सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थी भुगत रहे हैं।
शिक्षक (पंचायत/नगरीय निकाय) मोर्चा के बैनरतले विभिन्न संगठनों के शिक्षाकर्मी ब्लाक स्तर पर 20 नवम्बर से अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं। शिक्षाकर्मियों की मांग है कि समान कार्य समान वेतन के आधार पर सभी शिक्षाकर्मियों को संविलियन शिक्षा विभाग या आदिमजाति कल्याण विभाग में किया जाए। इसके अलावा 8 प्रमुख मांगें भी हैं। मुख्यमंत्री ने गत दिनों स्पष्ट रूप से कहा है कि शिक्षाकर्मियों के संविलियन को लेकर कोई बात नहीं होगी। सरकार आखिर संविलियन क्यों नहीं करना चाह रही है यह भी एक सोचनीय मुद्दा है। किसी प्रकार की कोई दिक्कतें होने पर ही सरकार इस मुद्दे पर पीछे हट रही है। शासकीय स्कूलों में इस आंदोलन का जबर्दस्त असर पड़ रहा है। सरकार ने शिक्षाकर्मियों पर दबाव बनाने बर्खास्तगी भय दिखा रही है। कुछ शिक्षाकर्मी नौकरी गवां बैठने के डर से आंदोलन छोड़कर वापस स्कूल भी पहुंच गए। वापस लौटने वाले शिक्षाकर्मियों की संख्या भले ही कम है लेकिन शिक्षाकर्मियों के आंदोलन को कुछ असर भी पड़ा है। शिक्षाकर्मी आंदोलन को आगे बढ़ाकर अब क्रमिक भूख हड़ताल करने लग गए हैं।
00 सोशल मीडिया पर छाया है मुद्दा :
सोशल मीडियो जैसे फेसबुक, वाट्सअप पर शिक्षाकर्मी और उनके समर्थक सरकार के रवैये लेकर खूब कोस रहे हैं। वहीं अधिकांश लोग शिक्षाकर्मियों के आंदोलन पर करारा प्रहार करने नहीं चूक रहे हैं। आंदोलनकारी भी सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल पर खुलेआम जवाब देने लगे हैं।
00 घी में आग डालने की कोशिश :
शिक्षाकर्मियों के आंदोलन को विपक्षी भी भुनाने जुट गए हैं। रोज अलग-अलग स्तर के जनप्रतिनिधि, नेता पंडालों में जाकर समर्थन दे रहे हैं। समर्थन में शिक्षाकर्मियों के आंदोलन को जायज बताकर सरकार को कोसने लगे हैं।

Source: 
Vision News Service

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