सरपंच और सचिव पर लगा शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप

सरपंच और सचिव पर लगा शौचालय निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप

ग्राम पंचायत पईभाटा मे लाखों रुपए के घोटाले का मामला सामने आया है। पंचायत में ग्राम सभा बैठक आयोजित की गई थी। यहां पर ग्रामीणों द्वारा पंचायत के पदाधिकारी एवं अधिकारियों के ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।

स्वच्छता अभियान के तहत जहां पर सरकार हर पंचायत को ओडीएफ करने के निर्देश दे रही है । जिसके तहत धमतरी जिला पूर्ण ओडीएफ घोषित कर पुरस्कृत किया किया जा चुका है। वहीं दूसरी ओर धमतरी जिला के नगरी ब्लाक के अंतर्गत आने वाला गांव पईभाटा पंचायत में सरपंच और सचिव पर बिना शौचालय निर्माण कराये उसका पैसा गबन किये जाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है की करीब 12 से 15 लोगों का शौचालय निर्माण के नाम पर सरपंच और सचिव ने मिलीभगत कर पैसा तो निकाल लिया लेकिन उसे हितग्राही को नही दिया गया । नगरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत पईभाटा में ओडीएफ में बड़ी गड़बड़ी ग्रामीणों ने उजागर किया । साल भर पहले पंचायत में शौचालय का निर्माण अभी भी अधूरा है तो वही लगभग डेढ़ दर्जन हितग्राही के नाम से फर्जी तरीके से शौचालय निर्माण राशि का आहरण कर लिया गया है ।इस बात को लेकर ग्राम सभा में जमकर हंगामा हुआ ।ग्रामीण का कहना है कि गांव का और आश्रित गांव में लगभग दो दर्जन शौचालय का निर्माण कार्य अभी तक अधूरा है इसके बावजूद जिला प्रशासन को फर्जी जानकारी देकर ओडीएफ पूरा कर लिया गया है। वही लगभग डेढ़ दर्जन हितग्रहियों के नाम से शौचालय निर्माण राशि का आहरण किया गया है जबकि हितग्राहियों को अभी तक राशि प्राप्त नहीं हुई है । साथ ही प्रोत्साहन राशि के नाम पर महज 5000 रूपये दिये गये है। यह सब सरपंच और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ है।

ग्राम सभा में हुए हंगामे के बाद सरपंच राधिका बाई के द्वारा शौचालय मे गड़बड़ी की बात स्विकार करते हुए लिखित में दिया गया है कि जिन शौचालय निर्माण अपूर्ण है उसे एक माह के भीतर पूर्ण करा लिया जायेगा । साथ 18 हितग्राहीयो को शौचालय के लिए 10 अक्टूबर तक प्रति शौचालय 12000 का भुगतान किया जायेगा।

वहीं नोडल अधिकारी एन.के.बागड़े पदमपुर ग्राम सभा में पहुंचे थे ग्रामीणों ने उनसे शिकायत भी की तो इस संबंध में उन्होंने कहा कि वह सिर्फ यह देखने के लिए आए थे की ग्राम सभा हो रहा है या नहीं ।शौचालय निर्माण के संबंध में स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी ही जानकारी दे पाएंगे।

इस मामले के प्रकाश मे आने के बाद अब अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है की जिन्हें मॉनिटरिंग और निर्माण कार्य की समीक्षा कर रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी । वे ही गलत जानकारी भेज रहे है। ग्रामीणों की मानें तो अन्य पंचायतों में भी जांच कराई जाए तो वहा भी शौचालय निर्माण मे फर्जीवाड़ का बड़ा खेल उजागर हो सकता है ।

Source: 
Lalluram News

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