10वीं शताब्दी का तालाब सौंदर्यीकरण का मोहताज

छत्तीसगढ़ के दन्तेवाड़ा में पर्यटन नगरी बारसूर के ऐतिहासिक बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण की घोषणा पर 5 साल बाद भी अमल नहीं हुआ। बारसूर महोत्सव में आए तत्कालीन वन व पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण के लिए 2 करोड़ रुपए मंजूर करने की घोषणा की थी। जिला प्रशासन ने 2 साल पहले तालाब की सफाई जरूर की, गई, जलकुंभी और बेशरम की झाडिय़ों को हटाया गया, लेकिन गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य अब तक नहीं हुआ, जिससे तालाब के एक चौथाई हिस्से में ही पानी ठहर पाता है। तालाब का सौंदर्यीकरण करवाकर बोटिंग की सुविधा देने की बात भी कही गई थी, लेकिन इन सुविधाओं का अता-पता नहीं है।
नगर पंचायत बारसूर के अध्यक्ष अमूलकर नाग का कहा, घोषणा के बाद भी फंड नहीं मिला है। बगैर धनराशि के काम कराना संभव नहीं है। तालाब का गहरीकरण कराने पर इसमें और भी ज्यादा पानी ठहर सकता है। इस बारे में प्रशासन और पर्यटन विभाग को पत्र लिख चुके हैं। करीब 53 एकड़ में फैला यह तालाब 10वीं शताब्दी में तत्कालीन छिंदक नागवंशी शासकों के काल में खुदवाया गया था। पुराने समय में इसका नाम द्वार समुद्रम था, जिसे अब बूढ़ातालाब के नाम से जानते हैं।
क्षेत्रीय इतिहास की जानकारी रखने वाले युवा ओम सोनी के मुताबिक छिंदक नागवंशी शासक जगदेक भूषण के सामंत चंद्रादित्य ने 1061 ई. में द्वार समुद्रम, चंद्रादित्येश्वर मंदिर, चंद्रादित्य सरोवर और उपवन का निर्माण कराए जाने का उल्लेख भैरमगढ़ और बारसूर के शिलालेख में है। चंद्रादित्य बस्तर की सीमा से लगे ओडि़शा के अंबागांव का महामंडलेश्वर भी था। भैरमगढ़ के शिलालेख में भी इसका जिक्र मिलता है। शिलालेख अब भी पुरातत्व संग्रहालय में सुरक्षित रखा है।

Source: 
visionnewsservice.in

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