148 बच्चों को मिला नया जीवन

हृदय रोग से पीडि़त नौनिहालों के इलाज के लिए राज्य शासन की ओर से संचालित मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना सैकड़ों बच्चों के लिए संजीवनी बनकर उन्हें नया जीवन दे रही है।
योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की ओर से 1 से 15 साल तक के आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवार के हृदय रोग से पीडि़त बच्चों का नि:शुल्क इलाज शासन के मान्यता प्राप्त अस्पतालों में कराया जाता है। ऐसे गरीब मां-बाप के लिए यह योजना बहुत बड़ा सहारा बन गई है। ये माता-पिता अपने बच्चों का इलाज तो कराना चाहते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे अपने बच्चों का बेहतर इलाज करा पाते। महासमुंद जिले के 148 बाल हृदय के बच्चों को इस योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। इन बच्चों के चेहरे में आज उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है। ये बच्चे पहले दौडऩे-कूदने में जल्दी थक जाते थे, सांस लेने में दिक्कत आती थी और कमजोरी महसूस होती थी। अब ये बच्चे भी दूसरे बच्चों की तरह खेलते-कूदते है, पढ़ाई करते हैं और सामान्य दिनचर्या व्यतीत करते है।
00 कहाँ के कितने बच्चों का हुआ ऑपरेशन :
मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसबी मंगरूलकर ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत महासमुंद जिले में वर्ष 2013 से वर्ष 2016 तक जिले के 148 बच्चों के हृदय रोग का नि:शुल्क उपचार कराया गया है। इनमें विधानसभा क्षेत्र महासमुंद के 15, खल्लारी के 24, बसना के 64 और विधानसभा सरायपाली के 48 बच्चों उपचार कराकर लाभान्वित किया गया है। इस योजना ने इन परिवारों की खोई हुई खुशियां वापस लौटा दी है। योजनान्तर्गत हृदय रोग से पीडि़त बच्चों के आपरेशन के लिए एक लाख 80 हजार रुपए से दो लाख 50 हजार तक की राशि का व्यय शासन की ओर से किए जाते हैं।

Source: 
Vision News Service

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