Agriculture

Agriculture

कृषकों का पंजीयन 31 अक्टूबर तक

समर्थन मूल्य में विक्रय किए जाने वाले धान के लिए कृषकों का पंजीयन कार्य 16 अगस्त से 31 अक्टूबर तक किया जा रहा है। वर्ष 2017-18 में पंजीकृत किसानों को वर्ष 2018-19 खरीफ वर्ष के लिए स्वतः पंजीकृत माना जाएगा। पूर्व में पंजीकृत किसानों को पंजीयन के लिए समिति में आने की आवश्यकता नही है, किन्तु यदि पूर्व में पंजीकृत किसान किसी कारण से पंजीयन में संशोधन कराना चाहते है, तो समिति में आवेदन प्रस्तुत कर संशोधन करा सकेंगे। रकबे में किसी भी प्रकार की वृद्धि संशोधन तहसीलदार के माड्यूल से ही किया जा सकेगा।

शून्य बजट-प्राकृतिक खेती देश और समाज के लिए कल्याणकारी : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशक दवाओं आदि के उपयोग से कृषि की लागत बढऩे से खेती अब कम लाभकारी व्यवसाय बनती जा रही है, ऐसे में ``शून्य बजट - प्राकृतिक खेती की अवधारणा न केवल किसानों बल्कि देश और समाज के लिए भी कल्याणकारी साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि ``शून्य बजट-प्राकृतिक कृषि ऐसी तकनीक है जिसमें कृषि करने के लिए न किसी रासायनिक उर्वरक का उपयोग किया जाता है और ना ही बाजार से कीटनाशक दवाएं खरीदने की जरूरत पड़ती है। उन्होंने इस पद्धति के आविष्कारक पद्मश्री सुभाष पालेकर के प्रति आभार व्यक्त किया और घोषणा की कि छत्तीसढ़ में कृषि विभाग, बीज निगम और कृषि विज्ञान

जीरो बजट एग्रीकल्चर की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा छत्तीसगढ़, कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य के पांच हजार किसानों को प्रशिक्षित करने के दिए निर्देश

जीरो बजट एग्रीकल्चर की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा छत्तीसगढ़

कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशक दवाओं आदि के उपयोग से कृषि की लागत बढ़ने से खेती अब कम लाभकारी व्यवसाय बनती जा रही है, ऐसे में ‘‘शून्य बजट – प्राकृतिक खेती’’ की अवधारणा न केवल किसानों बल्कि देश और समाज के लिए भी कल्याणकारी साबित हो रही है. उन्होंने कहा कि ‘‘शून्य बजट-प्राकृतिक कृषि’’ ऐसी तकनीक है जिसमें कृषि करने के लिए न किसी रासायनिक उर्वरक का उपयोग किया जाता है और ना ही बाजार से कीटनाशक दवाएं खरीदने की जरूरत पड़ती है.

टेकारी के किसानों ने संभागायुक्त को समस्याएं बताईं

व्यापक स्तर पर हुयी बंदोबस्त त्रुटियों से आरंग तहसील के ग्राम टेकारी के किसान हलाकान है।व्यथित किसानों ने संभागायुक्त ब्रजेश चंद्र मिश्रा से मुलाकात कर हालात व व्यथा सुनाई। श्री मिश्रा ने आरंग तहसीलदार अनुभव शर्मा को समयबद्ध कार्यवाही हेतु निर्देशित किया।

किसान फसल बीमा के भुगतान से वंचित

जिले के कांकेर ग्राम पंचायत के 194 किसानों को प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमे की राशि का भुगतान नहीं हुआ। उप संचालक कृषि विभाग ने इफ्को टोक्यो जनरल इंश्योरेन्स कंपनी लिमिटेड के प्रबंधक को पत्र के माध्यम से सूचित किया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2017 के खरीफ में अधिसूचित ग्राम पंचायतवार जारी थ्रेसहोल्ड उपज मे चावल प्रति हेक्टेयर 153 रुपए किलोग्राम बागोडार में धान असिंचित है उसके अलावा खरीफ वर्ष 2017 मे उपज में हुई कमी के कारण फसल बीमा का दावा किया जिसका भुगतान उक्त किसानों को अभी तक नहीं मिल पाया है। उन्होंने प्रबंधक को बताया है कि किसानों को हुए नुकसान की पुनः गणना कर बीमा दावा

बीज वितरण करने का लक्ष्य निर्धारित

बिलासपुर जिले में खरीफ वर्ष 2018 में धान, दलहन, तिलहन और अन्य बीज वितरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उपसंचालक कृषि की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार जिले में खरीफ वर्ष 2018 में कुल 35833 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

लोन पर मिलने वाले खाद में मिल रहा है कुछ ऐसा, जिसके चलते बढ़ी किसानों की मुश्किलें, ​प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान

Kishan khad

बालौद. एक और प्रदेश सरकार विकास का ढोल पीटने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं तो वहीं दूसरी ओर लोगों को परेशानियों के सीवा कुछ भी हाथ नहीं लग रहा है. ऐसा ही एक ताजा मामला डौंडी में किसानों को खाद के जगह पत्थर देने का सामने आया है.

आपको बता दें कि खेतीहार किसानों के लिए डौंडी के कोटागाँव मे खाद गोदाम का निर्माण कराया गया है. जहां से लगभग 10 गांव के हजारों किसानों को खाद का वितरण किया जाता है. लेकिन किसानों को इतनी आसानी का खाद नहीं मिलता है.

धान फसल क्षति के मुआवजे का हो रहा आंकलन

 धान फसल क्षति के मुआवजे का हो रहा आंकलन

नगरनार क्षेत्र में पिछले दिनों एकाएक पानी खेतों में भरने से लगभग 45 हेक्टेयर धान की फसल को क्षति पहुंची है। इससे लगभग 100 किसान प्रभावित हुए हैं। इन सभी को मुआवजा दिये जाने की घोषणा एनएमडीसी की ओर किए जाने के बाद नायब तहसीलदार मलय विश्वास के साथ राजस्व अमला किसानों को मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया में जुटा है।

शुरूआती दस दिनों में 90 हजार 732 क्विंटल धान की हुई खरीदी

शुरूआती दस दिनों में 90 हजार 732 क्विंटल धान की हुई खरीदी

15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी के बाद से अभी तक आधे खरीदी केन्द्रों में धान की आवक शुरू नहीं हो पाई है। अब तक 116 केन्द्रों से 90 हजार 732 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। ज्यादातर किसान खेत गीली होने से कटाई नहीं करा पाए है। इस वजह से पकी फसल का इंतजार हो रहा है, वहीं जल्दी पकने वाले धान धीरे-धीरे सोसाइटियोंं तक पहुंचने लगा है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरु होने के दस दिनों बाद भी 90 केन्द्रों में छाई वीरानी छंट नहीं पाई है। यहां अभी तक खरीदी की बोहनी नहीं हुई है।

भयंकर सूखे की चपेट में छत्तीसगढ़, केन्द्रीय दल की रिपोर्ट में खुलासा

भयंकर सूखे की चपेट में छत्तीसगढ़, केन्द्रीय दल की रिपोर्ट में खुलासा

छत्तीसगढ़ भयंकर सूखे की चपेट में है. राज्य सरकार की रिपोर्ट से ज्यादा गंभीर परिणाम केन्द्रीय जांच दल की रिपोर्ट में सामने आई है. केन्द्र से आई अधिकारियों की टीम ने 6 जिलों का दौरा कर जो रिपोर्ट बनाई है उसमें 85 प्रतिशत सूखा होने की बात कही है. मुख्य सचिव विवेक ढांढ के साथ केन्द्रीय जांच दल ने बैठक की. बैठक में केन्द्रीय जांच टीम के अधिकारियों ने कहा जिन जिलों में वे अध्ययन करने पहुँचे वहां स्थिति राज्य सरकार की रिपोर्ट कहीं ज्यादा गंभीर है.

Related News